महासचिव – कोविड व लैंगिक हिंसा पर वक्तव्य (5 अप्रैल 2020)

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कोविड-19 महामारी दुनिया भर में असीम मानवीय तकलीफ़ें और आर्थिक तबाही पैदा कर रही है.
मैंने इस महामारी का एकजुट मुक़ाबला करने पर ध्यान लगाने के लिए हाल ही में तत्काल वैश्विक युद्धविराम का आहवान किया था.
मैंने हर जगह हिंसा तुरंत बंद करने की अपील की थी, तत्काल.
लेकिन हिंसा केवल युद्धक्षेत्र तक ही सीमित नहीं है.
बहुत सी महिलाओं और लड़कियों के लिए, ख़तरा वहीं ज़्यादा है जहाँ उन्हें सबसे ज़्यादा सुरक्षित महसूस करना चाहिए, उनके अपने घरों में.
इसलिए आज मैं घरों में शांति के लिए एक नई अपील करता हूँ –– और शांति सभी घरों में – दुनिया भर में.
हम जानते हैं कि तालाबंदी व एकांतवास कोविड-19 महामारी को दबाने के लिए आवश्यक हैं. लेकिन इनके कारण महिलाएँ अपने दुर्व्यवहारी व हिंसक पार्टनरों के साथ असहाय स्थिति में फँस सकती हैं.
बीते सप्ताहों में जैसे-जैसे आर्थिक व सामाजिक दबावों के साथ-साथ डर भी बढ़ा है, हमने घरेलू हिंसा में वैश्विक स्तर पर भयावह उछाल देखा है.
कुछ देशों में, सहायता सेवाओं से मदद की गुहार लगाने वाली महिलाओं की संख्या दोगुनी हो गई है.
इस बीच, चिकित्सा सेवाएँ व पुलिस पर बहुत बोझ पड़ा है और उनके पास स्टाफ़ की भी कमी है.
स्थानीय सहायता समूह निष्क्रिय हैं या उनके पास धन की कमी है. घरेलू हिंसा के प्रभावितों की मदद के लिए बनाए गए आश्रय स्थल बंद हो गए हैं, अन्य पूरी तरह भर गए हैं.
मैं सभी सरकारों से आग्रह करता हूँ कि वो कोविड-19 का मुक़ाबला करने के राष्ट्रीय प्रयासों में महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा की रोकथाम व सहायता को एक मुख्य हिस्सा बनाएँ.
इसका मतलब है कि ऑनलाइन सेवाओं और सिविल सोसायटी संगठनों में और ज़्यादा धन ख़र्च करें.
सुनिश्चित करें कि न्याय प्रणालियाँ शोषणकर्ताओं को न्याय के कटघरे में अवश्य लाएँ.
दवाएँ व घर का सामान बेचने वाली दुकानों में आपात चेतावनी प्रणालियाँ लगाई जाएँ.
आश्रयस्थलों को आवश्यक सेवाएँ घोषित किया जाए.
महिलाओं को सहायता माँगने के सुरक्षित तरीक़े निकाले जाएँ, उनके पार्टनरों को ख़बर हुए बिना.
मज़बूत व सहनशील समाजों के लिए महिलाओं के अधिकार व स्वतंत्रताएँ अति आवश्यक हैं.
एकजुट होकर हम हर कहीं हिंसा को रोक सकते हैं और रोकना ही होगा, युद्धस्थलों से लेकर लोगों के घरों तक में, क्योंकि हम सभी कोविड-19 का मुक़ाबला करने में लगे हैं.

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